Thursday, 8 January 2026

ठहरी सी जिंदगी में

सिर्फ कागजों सी कोरी
मेरी जिंदगी में हो तुम
मेरे गम से और इस दिल से
निकल गये हो तुम
खाली सा है हर कोना
क्यों बिखर गए हैं हम तुम
मिलकर भी मिल ना पायें
क्यों खो गये हम तुम
फिर तुम से जिन्दगी में
मुलाकात हो या ना हो
बस इसी पल में जिलू
फिर ये जनम हो या ना हो
ठहरी सी जिंदगी में
ये सैलाब क्यों और कब आया
में ठहर गया क्यों दो पल
जग ने कर लिया किनारा
अब भीड़ में, मैं गुम हूं
तुम से फिर क्यों टकराया
इन रास्ताें में चल कर
बड़ी दूर हो गये हम
तुम न आते फिर इस तरह
हम तुम फिर मिल भी पाते या ना




Saturday, 11 May 2019

बस ! ....तुम संग हो.

में जब जब भागा हूं
खुद से या तेरी परछाई से
मुड़ कर पलटकर ये ही पाया
कभी ज्यादा दूर न जा सका
तुझ से या तेरी परछाई से
में लाख बार बहका हुं
कई बार रूका
बार बार मुड़ा हूं
बस ये ही जाना
तुम से रूठ कर
जब जब मैनें कदम उठायें हैं
सिवाये अंधकार के
मेरे संग कोई न था
तुम थी महज अन्तरमन में
हूबहू नजदीक
सामने कोई न था
में जब जब भटका हूं
तब तब मैनें तुम्हें
मुझे अंधेरो से
बाहर खिंचते पाया
आज फिर से
वही उम्मीद जता दो
तुम हो कहीं
यहीं मेरे आसपास
मेरे इर्दगिर्द जब जब तुम हो
यही लगा जैसे रब हो
रब सब देखता है
गौर करता है
फिर जरूरत हो सो साथ देता है
उस तरह तुम मेरे संग संग हो
बस यकीन करा दो
बस तुम संग हो....

Sunday, 5 May 2019

तेरे बिन

तेरे बिना अधुरा 
में अधुरी हो तुम 
रहे बिन कहीं 
ना ये कदम मेरे
फिरे इधर उधर 
जाने कहाँ कहां 
देखो देखा नही 
मैनें तुम्हें कल से
कल जैसे एक पल सा था 
थम गये हो हम जैसे 
गुजर गया वक्त जैसे 
फिर से एक बार मुठठी से 
लगा जैसे सब 

Friday, 3 May 2019

मैं टूट कर

मैं टूट कर
बिखरा हर बार
तुम मानो या ना मानो
हिस्सा हूँ बस तेरा
लाख रूठ लो तुम
रह पाओगी
न बिन मेरे
दूर कर मुझे
जी पाओगी
न बिन मेरे
तुम भी जानती हो
मुझको भी पता है ये
कई बार छुपा ले नजरें हम
सब जानते है क्या है दिल में
लब खुल पाये न कभी
दिल जानता है इस दिल में
सिर्फ तुम ही हो बस तुम ही हो
देखो रहे अब तक चुप तुम हम
प्यार छुपा ना कोई गम
गम का क्या है
आज है ,कल हो..... या ना हो !
तुम हम आज भी है
प्यार भरा ये जो दिल में है


Tuesday, 23 April 2019

जिन्दगी जैसे तुम बिन...

तुम से में न मिलू
ऐसा है ना होगा कभी
तुम जिन्दगी में
जब से आई हो मेरे लिये
क्या से क्या में बना
क्या था में क्या हुआ
तुम धड़कन
मुझमें तुम धड़कते हो
जाऊ में भी कहां
हर तरफ तुम बस तुम दिखते हो
पाऊ में या छोड़ दू
मुझमें तुम ही बसते हो
कागज सा कोरापन
जिन्दगी जैसे तुम बिन
में अधुरा हूं जैसे
तुम अधुरी हो मेरे बिन
लाख हम करे कोशिशते
मिल न पाए तो क्या हो फिर
जां में तुम हो मेरे
मिठ न जाये तो क्या करे
रूह से हम एक है
अब कायनात ही मिलाये हमें
देखाे क्या से क्या हो गया
में क्या था
क्या हो गया
मिले तुम कुछ पल
तड़पा में हर पल
राह में था
और भटका
था क्या
क्या हुआ
मिठ गया
तोड़ा गया
प्यार में .....
नफरत क्यों मिली
क्या यही हशर है
प्यार का
या जो प्यार में है
क्यों नफरत से देखते हैं
प्यार को या जो प्यार में हो

ठहरी सी जिंदगी में

सिर्फ कागजों सी कोरी मेरी जिंदगी में हो तुम मेरे गम से और इस दिल से निकल गये हो तुम खाली सा है हर कोना क्यों बिखर गए हैं हम तुम मिलकर...