आज मन की खुली खिड़की से बाहर झॉका तो सोचा वक्त देखो कितनी तेजी निकल गया हो. जैसे कल कि ही बात हो, मैं जैसे भीड़ सा गुजर गया और कुछ अब भी भीड़ में थे;तुम को छुटे एक अरसा हो गया हो पर लगा कि जैसे कुछ पल ही गुजरे हो.
ये राह अब मुझे किस और ले जाए क्या पता, पर एक बात है जो मुझे अब भी तुम से जोड़े हैं और वो हो तुम अौर बातें तुम्हारी....
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