हो अगर सकता ये मेरा
मॉग लेता मैं खुद से तुझे
डोर सी जुड़ी है तू जिन्दगी से
हार लेता खुद से तुझे
मॉग भी है ये मेरी
तू ही है बस आखिरी
आरजू में तेरे में
पार लेता सब से तुझे
एक दिन की बात होती
या फिर होती , सदियों की दूरी
दूर में रखता तुझे ही
सामने से अपने तुझे
पास में या दूर तू है
दूर में रखता तुझे
दूर से करता मुहब्बत
पास आ जँचता तुझे
मॉग लेता मैं खुद से तुझे
डोर सी जुड़ी है तू जिन्दगी से
हार लेता खुद से तुझे
मॉग भी है ये मेरी
तू ही है बस आखिरी
आरजू में तेरे में
पार लेता सब से तुझे
एक दिन की बात होती
या फिर होती , सदियों की दूरी
दूर में रखता तुझे ही
सामने से अपने तुझे
पास में या दूर तू है
दूर में रखता तुझे
दूर से करता मुहब्बत
पास आ जँचता तुझे
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