क्यों पहला प्यार ही अकसर
टूटकर बिखर जाता है
कोई कितना ही चाहे किसी को
वो ही आधे रास्ते में
छोड़ कर चला जाता है
क्यों हम उसे
अपने सामने से जाते
बस देखते रहते हैं
टूट कर तो प्यार
पहले से बिखरा था
मगर छोड़ कर नजदीक से
अब जाते देखते हैं
लौटकर आने की
एक उम्मीद भी रखते हैं
उस से जुड़ी हर याद को
सम्भालकर सदा सिरहाने रखते हैं
क्यों इतनी बेकरारी से
हम उसका इन्तजार करते है
जिसने जाते वक्त एक दफा भी कभी
पलटकर कभी पीछे न देखा
उस से जुड़ी हर बात को
तब भी सीने में संजोकर रखते हैं
टूटकर बिखर जाता है
कोई कितना ही चाहे किसी को
वो ही आधे रास्ते में
छोड़ कर चला जाता है
क्यों हम उसे
अपने सामने से जाते
बस देखते रहते हैं
टूट कर तो प्यार
पहले से बिखरा था
मगर छोड़ कर नजदीक से
अब जाते देखते हैं
लौटकर आने की
एक उम्मीद भी रखते हैं
उस से जुड़ी हर याद को
सम्भालकर सदा सिरहाने रखते हैं
क्यों इतनी बेकरारी से
हम उसका इन्तजार करते है
जिसने जाते वक्त एक दफा भी कभी
पलटकर कभी पीछे न देखा
उस से जुड़ी हर बात को
तब भी सीने में संजोकर रखते हैं
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