Tuesday, 26 February 2019

एक गीत

एक गीत मुझे जँचता
एक नाम ही में जपता
एक साज के साथ तेरे
एक ताल में मैं थिरकता
मन कर मन सी कोरी
मन के दर्पण में तुम ही
मन जानकर मन है
मन से निकल कर तुम ही
तुम पर मेरा वश है
तुम से है सब जरूरी
तुम खो नही सकती
तुम पाते सब भी
अन्तर मन में रखकर
हो समान तुम अन्दर बाहर

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