एक गीत मुझे जँचता
एक नाम ही में जपता
एक साज के साथ तेरे
एक ताल में मैं थिरकता
मन कर मन सी कोरी
मन के दर्पण में तुम ही
मन जानकर मन है
मन से निकल कर तुम ही
तुम पर मेरा वश है
तुम से है सब जरूरी
तुम खो नही सकती
तुम पाते सब भी
अन्तर मन में रखकर
हो समान तुम अन्दर बाहर
एक नाम ही में जपता
एक साज के साथ तेरे
एक ताल में मैं थिरकता
मन कर मन सी कोरी
मन के दर्पण में तुम ही
मन जानकर मन है
मन से निकल कर तुम ही
तुम पर मेरा वश है
तुम से है सब जरूरी
तुम खो नही सकती
तुम पाते सब भी
अन्तर मन में रखकर
हो समान तुम अन्दर बाहर
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