Saturday, 11 May 2019

बस ! ....तुम संग हो.

में जब जब भागा हूं
खुद से या तेरी परछाई से
मुड़ कर पलटकर ये ही पाया
कभी ज्यादा दूर न जा सका
तुझ से या तेरी परछाई से
में लाख बार बहका हुं
कई बार रूका
बार बार मुड़ा हूं
बस ये ही जाना
तुम से रूठ कर
जब जब मैनें कदम उठायें हैं
सिवाये अंधकार के
मेरे संग कोई न था
तुम थी महज अन्तरमन में
हूबहू नजदीक
सामने कोई न था
में जब जब भटका हूं
तब तब मैनें तुम्हें
मुझे अंधेरो से
बाहर खिंचते पाया
आज फिर से
वही उम्मीद जता दो
तुम हो कहीं
यहीं मेरे आसपास
मेरे इर्दगिर्द जब जब तुम हो
यही लगा जैसे रब हो
रब सब देखता है
गौर करता है
फिर जरूरत हो सो साथ देता है
उस तरह तुम मेरे संग संग हो
बस यकीन करा दो
बस तुम संग हो....

Sunday, 5 May 2019

तेरे बिन

तेरे बिना अधुरा 
में अधुरी हो तुम 
रहे बिन कहीं 
ना ये कदम मेरे
फिरे इधर उधर 
जाने कहाँ कहां 
देखो देखा नही 
मैनें तुम्हें कल से
कल जैसे एक पल सा था 
थम गये हो हम जैसे 
गुजर गया वक्त जैसे 
फिर से एक बार मुठठी से 
लगा जैसे सब 

Friday, 3 May 2019

मैं टूट कर

मैं टूट कर
बिखरा हर बार
तुम मानो या ना मानो
हिस्सा हूँ बस तेरा
लाख रूठ लो तुम
रह पाओगी
न बिन मेरे
दूर कर मुझे
जी पाओगी
न बिन मेरे
तुम भी जानती हो
मुझको भी पता है ये
कई बार छुपा ले नजरें हम
सब जानते है क्या है दिल में
लब खुल पाये न कभी
दिल जानता है इस दिल में
सिर्फ तुम ही हो बस तुम ही हो
देखो रहे अब तक चुप तुम हम
प्यार छुपा ना कोई गम
गम का क्या है
आज है ,कल हो..... या ना हो !
तुम हम आज भी है
प्यार भरा ये जो दिल में है


Tuesday, 23 April 2019

जिन्दगी जैसे तुम बिन...

तुम से में न मिलू
ऐसा है ना होगा कभी
तुम जिन्दगी में
जब से आई हो मेरे लिये
क्या से क्या में बना
क्या था में क्या हुआ
तुम धड़कन
मुझमें तुम धड़कते हो
जाऊ में भी कहां
हर तरफ तुम बस तुम दिखते हो
पाऊ में या छोड़ दू
मुझमें तुम ही बसते हो
कागज सा कोरापन
जिन्दगी जैसे तुम बिन
में अधुरा हूं जैसे
तुम अधुरी हो मेरे बिन
लाख हम करे कोशिशते
मिल न पाए तो क्या हो फिर
जां में तुम हो मेरे
मिठ न जाये तो क्या करे
रूह से हम एक है
अब कायनात ही मिलाये हमें
देखाे क्या से क्या हो गया
में क्या था
क्या हो गया
मिले तुम कुछ पल
तड़पा में हर पल
राह में था
और भटका
था क्या
क्या हुआ
मिठ गया
तोड़ा गया
प्यार में .....
नफरत क्यों मिली
क्या यही हशर है
प्यार का
या जो प्यार में है
क्यों नफरत से देखते हैं
प्यार को या जो प्यार में हो

Monday, 8 April 2019

या... तुम्हें प्यार करे हम !

हम ने तुम्हें क्यों इतना चाहा
कह भी न पाए ,क्यों तड़पाया
बस दिल ही दिल में
रही बात ये
तुम्हे सब पता है
जानते है ये
इन आँखों में बस एक बार
झाँक तो लो
किसका है चेहरा
ये जान तो लो
छुपाया है अब तक
तुम से ये राज कब से
बताते भी कैसे
छुपाते भी कितना
तुम्हे सब पता है
क्या तुम से छुपा है
ये हाल ऐ दिल मेरा
क्यो धड़कता है किस पे
समझो कभी तो जरा
चुप है हम तुम
एक दूसरे से
प्यार है कितना
है एक दूसरे से
दर्द में हम तुम
गुजरे एक दौर से हैं
कितना वक्त यूं बरबाद करा है
तड़पे है हम इस प्यार में इतने
कितने दिन और कितने लम्हे
सोच सोच कर हम रोये है
आँखे भर भर के सोये है
और अब कितना
इन्तजार करे हम
यूं ही जिन्दगी भर रोये
या तुम्हें प्यार करे हम


Sunday, 7 April 2019

देखों ...में सोया नही हूं

क्यों यादें तेरी कभी
मुझे रोने नही देती
आंखें हैं भरी पर
छलकने नही देती
दर्द बहुत है
बहुत जोरों का
इसी दर्द में कई बार
बस जिए जा रहे है
कई भागते दिखे है
साये से अपने
पलट कर न देखें तो क्या
फर्क है उन में मुझमें
में तेरे इश्क़ में हूं
फिर भी सताया गया हूं
भगाया गया हूं
रूलाया गया हूं
कदम दर कदम
बस अंधेरा मिला है
न रोशनी मिली है
न सवेरा दिखा है
हारा हुं में कई बार भटका हूं
बिना तेरे कितनी
रातें जगा हुं
सपने भी खाली
तुम बिन भी में खाली
देखो मेरे पास
आखिर क्या बचा हैं
आओ मेरे पास
पास बैठों मेरे
देखो में कब से
देखो. . में सोया नही हूं.


मेरी किस्मत.... इतनी कमजोर क्यों है

माना ईश्क में हम
थोड़े कमजोर है
दुआ को उठा के हाथ
फिर दिखे किसे है
है एक पल का खोना
सदियों बिछड़ना
रब को पता है
उस से क्या छुपा है
दर्द में, मैं हूँ
ये तुम्हे भी पता है
समझ तुम सको
जानता हूँ इस से
अनजान तुम नही हो
कुछ हैरान हूं मैं
परेशान भी हूं
मेरी जिंदगी में
क्यूँ तूफां बहुत हैं
कभी सरर से मुझसे अपने छूटे
कितने सपने बस यू ही टूटे
हिस्से में ,मैं कितने बार बटा हुं
कई बार बिखरा
फिर एक जुट हुआ हूँ
"मेरी किस्मत !
इतनी कमजोर क्यों है
जब जब मिलना हो तुम से
फिर धुमाती इतना क्यों है "




में हू तेरे आस-पास...

ना कह सकू ना तुम से ये कह सका आज तक रहो कही भी पर रखना दिल पे मेरी कही हर बात रहो तुम कही पर ये रहे याद में हू तेरे आस-पास यहीं कहीं

Saturday, 6 April 2019

मरना तुम ही संग हैं....

ये दो पल का जीना
इस प्यार को में क्या नाम दू अब
ख्वाबो में मिलना, हकीकत हैं बिछड़ना
कहे भी क्या तुम से, छुपा भी क्या पाये
सच ये ही है बस ,बिछड़ना फिर मिलना
समझ तुम भी गये हो
पता मुझको भी है
इस एक जनम को छोड़
बस मिलना हर जनम है
भटक हम रहे है
भटका सब रहे है
बता कुछ रहे नहीं
थका सब रहे है
ये सावन के झूले
बिन तेरे हम अकेले
रह भी न पाए
कुछ कह भी न पाए
माना इस मोहब्बत में
अभी सहना बहुत है
मिलना लिखा हो या ना हो
सबर रखना बहुत है
घुट घुट कर हम जी सब रहे हैं
गिन गिन कर सांसे रोज ले रहे है
कब तक यू जीना है
क्यों जग में रहना है
मिलना नही, फिर
बिछ़डना ही क्यों लिखा है
देखो जिन्दगी हम से
ये क्या कह रही है
मिला तो नहीं सकती
क्यों फिर सता रही हैं
लाख आये अड़चनें
फिर भी मिलना तुम ही से
पा न सके तो क्या
मरना तुम ही संग हैं



फिर एक बार

देखो फिर एक बार
तकदीर हमें एक-दूसरे के
सामने ले आई
हम एक दूसरे से नफरत
चाहे लाख कर ले
बस प्यार ही है
जो हम एक दूसरे से
बस एक सा करते है
हम लाख झूठला ले
खुद को इस हकीकत के
पायेगें हमेशा, खुद को ईरद गिरद इस के 

ये पल....

सोचकर देखो तुम
खुद को मुझमें पाओगी
माना दिल में तेरे बस में हूं
बस में और कोई नहीं
बस साये में
तेरे साथ साथ
तुम मुझे पाओगी
न तुम स्वप्न में हो ,न मैं
पर देखो फिक्र एक सी है
दोनों में एक दूजे के लिए
याद नही तुम को आखिरी बार
कब देखा कहां देखा था
बस में ही कसमकस में था
फिर याद आया कोई और भी था
मेरी तरह बेबाक, मेरी तरह तटस्थ
सोच में हु फिर कब मिलेगें
जानता हूँ ये पल
कभी यूं ही गुजरेगें

Friday, 5 April 2019

जिन्दगी की कतरन...

जब जब तुम मेरी जिंदगी में आई
तब तब में शामिल रहा
फिर जैसे लगा
कुछ छुट गया हो पीछे
राह में था पर राह छूट रही हो जैसे
लगा मुझे जैसे कुछ छुट रहा हो पीछे
मैं जानता हूँ मै लायक नहीं था कल भी
आज सब है पर फिर भी एक खालीपन सा है
अन्दर ही अन्दर जैसे टूट गया हूँ मैं
सब बिखर गया हो मुझसे
मैं अन्दर से हिम्मत कितनी ही कर लू
पर टूटकर बिखरा हर बार में ही हूं
जानता हूँ सब किस्मत के हाथों है
टूट ना बिखरना
हार कर ही सही
हारा हुं में अपनो से ही
गम भर रहा ये
मैं क्या हूँ
क्या से क्या हो गया मैं
अब खोने को कुछ नहीं था
फिर भी पाने की चाह मन में थी
वो सब पाने की
जो कतरनों की शक्ल में
मुझसे फिसरते रहे ,छूटते रहे




तन्हा सा में

बात जब जब कर लू
पर सपने में ,मैं
अब भी खाली हुं
अकेला सा में
तुम को सोचु
तुम पर लिखू
कागज सा कोरापन
रख अन्दर अन्दर
कितना हूं खाली तन्हा सा में 

Monday, 1 April 2019

सच ......भाग ने से !

आजमाकर देख ली कई बार जिन्दगी
सच ये तब पता लगा
गैरों की इस भीड़ में
सब तमाशबीन है
अपना कोई नहीं
जानते है ये बस
छलावा है और कुछ नहीं
सब हार कर भी
पता लगा तो
क्या पता लगा
सब खो कर जाना
कभी महसूस
पा कर किया नहीं
सच ही कहते है
अक्ल तब आती है
जब सब खो दो
सब कुछ हार के
पीछे छोड़ दो
में भागा हुं जब जब
खुद से या जिन्दगी से
मुझे वो ही मिला
सब छोड़ के
पीछे मुड़ के
नसीब से
सच ....भाग ने
सब पीछे नहीं छूटता
कुछ न कुछ रह जाता है
अन्दर और अन्दर....






Friday, 22 March 2019

वो तुम हो सिर्फ तुम हो.... और कोई नहीं.

राह से में जब जब भटका
हाथ पकड़ मुझे राह दिखाई तुमने
में कई बार गिरा, कई बार रूका
मुझे मंजिल बता राह दिखाई तुमने
में फिर गिरा, फिर उठा
मेरी बाह जो थामी वो तुम ने
लाख बार गिरते है हम
फिर हाथ बढ़ा के जो थाम ले
सच खुदा नहीं है
फिर लगा खुदा सा है कोई
जो हमें गिरने पर थाम ले
बाह फैला हमें समेट ले, हमें घेर ले
पुछता हूँ में सब से
कौन है वह. .. कौन है
जो हर पग है
हर पल है
हर छन है
हमें घेरे हुए

तुम मेरे लिये बनी हो ........मैं तेरे लिये .

बस करो
प्यार से देखना मुझे
इन आँखों में बस
प्यार ही प्यार है बस तेरे लिये
तुम मुझसे मुंह मोड़ाे
या मेरी तकदीर से
नजर तुम को भी आ रहा है
कौन हूँ मैं तेरे लिये
लाख तुम मिन्नत कर लो
मुझसे ये सब छुपा ने की
सब जानती तुम हो
कौन हूँ मैं तेरे लिये
देखो धुम धुम कर ये दुनिया
फिर हमें एक दूसरे के सामने ले आती है
तुम ये खुद से छुपाओ
या में सब से
पर ये तय है पहले से
तुम मेरे लिये बनी हो मैं तेरे लिये

तुम बिन में....

तुम बिन में कुछ नहीं
बस एक शरीर हूं और कुछ नहीं
जब से तुझसे जुड़ा हूं
लगा जैसे में खुद से मिला हूं
नजदीक से बस एक तुम ने
छुआ है इस मन को
कल तक सिर्फ एक जिस्म था
आज जैसे रूह से मिला हूं खुद की
मुझको तुम ने बनाया
बनाकर भूल गए तुम
कभी मिल न सके कभी आ न सके
व्यस्त रहे , मुझसे छुपकर तुम


Thursday, 14 March 2019

मेरे सपने और मैं

बात उन दिनों की है जब मै काम की तलाश में एक जगह से दूसरी जगह बस भटक रहा था काम के लिए जाने क्याें मुझे ऐसा लगने लगा लोगो के दिल में मेरे लिये या मेरे जैसे किसी भी व्यक्ति के लिए हमदर्दी क्यों नहीं है हम जिस समाज में रहते हैं वहां एक उम्र के बाद हमें काम के लिए घर के बाहर निकल न ही पड़ता है काम वो काम जिसे कर के घर में पैसा आ सके हम अपने लोगों के लिए कुछ कर सके ये ही सोच ले में घर से बहार निकल कमाने की आस में निकल पड़ा हर किसी की तरह मेरे दिल में भी कुछ सपने कुछ अरमान थे में बहुत भटका इधर से उधर जाने कहाँ कहां पर कहते है जिन्दगी हम को वहीं ले आती जहाँ हम जाना चाहते हैं और जो पाना चाहते वही हम को एक दिन मिल के रहता. मेरा मान ना है ज़िन्दगी में सपने देखो उन के पीछे भागो पर रुको मत कुछ ठोकरें हर एक के नसीब में शामिल होती है असल ये ही वह पल होते है जो हमे ये राह दिखाती है कि ठौकरों से मत डरे बस और आगे बढ़ने की कोशिश कर के रहो. मैं इन ही ठौकरों में कई बार भटका लड़खड़ाया बस एक सपना कुछ करना है कुछ कर दिखाना है कभी सीधे तौर पर यह समझ सके कि मैं हारा नही बल्कि कुछ न कुछ करता रहा मैने जिन्दगी वहां से शुरू करी जिस बात को याद कर गर्व मैनें कितने नीचे से शुरूआत की कोशिश करता रहा हमेशा आगे निकल ने की मुझे याद है मैनें कभी सपने में भी नही सोचा था कि मैं कभी लिख कर अपने यह पल आप सभी से साझा करूगा आज भी मेरे घर में किसी को कुछ पता है कि मैं चोरी छुपे कभी गीत कभी कविता रचता हूं मैं आज भी कुछ लिखने बैठता हूं तो यह सोच में पड़ जाता हूं क्या में कभी इतना अच्छा लिख सकता हूँ कि लोग ज्यादा से ज्यादा यहां आ कर मुझे पढ सके समझ सके मेरी कविता को मुझको में आप सभी को हार्दिक शुभकामनाएँ देता हूँ कि आप सभी यहाँ पर आकर जो वक्त मुझे और मेरे लिखे ब्लॉग पढ के देते है असल में ही वो सपने है जो में देखा करता था सोचा करता था दुनिया में कहीं कोई कभी मुझे भी पढे महसूस करे कि मैं भी हू कही, कही दूर पर इन शब्दो से आप सभी के करीब बेहद करीब इसी दिल में.

Saturday, 9 March 2019

एक ही है न कि अलग अलग


तुम से मिलकर


शुभ प्रभात मित्रों


मेरे गीत तुम्हारे

मेरे गीत अब भी तुम्हारे
दिल के करीब हैं
दिल अब भी
धड़कता है मेरे लिये
मैं जानता हूँ तुम भी
हम किस के कितने
दिल के पास है
दिल से दूर
ये मन ही है
जिसे हम छलते है रोकते है बढने से
मन में आकंनसाये बहुत है
उन आकंनसाओ में तुम
चाहे तुम से छुपा लू या खुद से
मन ही मन सब तुम को पता है
क्या हू में क्या हो तुम मुझमें..

मेरी बातें तुम से....

मेरी बातें तुम से
तुम मेरी बातों में
सपने तुम से
तुम मेरे सपनो में
तुम मुझसे में तुम से
जुड़े है जन्मो जन्मो से
लाख सही फासलो में हम तुम
लाख सही उलझन रिश्ताें में
लाख करे फिर बाते अपनी
मिलकर बिखरकर है हम एक ही
नजरों से है दूर यदि पर
सपने बाकी अब भी खाली
खाली घर में, में कितना खाली
तुम कितने में कितना खाली

Saturday, 2 March 2019

आखिरी रात...

वो कागज का कोना
वो बारिश में भीगा
जुड़ा हिस्सा हूँ में
तेरे नाम का
खुद ही से कई बार
मिलता रहा हुं
जुड़ा न किसी से
ये शब्द आज हैं
कोई नाम मेरा
पुकारे कही से
दीवारे है न कहीं
न कोई पास आज है
तुझे भूलना ही
अच्छा रहेगा
ये सितम की मेरी
आखिरी रात है|

Friday, 1 March 2019

एक खत... वो शब्द.

पते नही बदलते
न खत बदलते है
बदल जाते है
तो शब्द
वो जज्बात
जो कुछ देर पहले
अन्दर पल रहे थे
कुछ कह रहे थे
कुछ बदल रहे थे
कुछ सिमटे खामोश
बिखरकर चुपचाप
एक खत
किसी की लत बन
सज संवर रहे थे
सोचा, खामोश है
बिखेर दो
पर "पता" न था
न ठिकाना
न बहाना
न किनारा
जो बहकर
लग जाये
किनारे..........!
मुझ सा बेशक.


खोयी खोयी सी वो..

कभी कभी मन में
कोई तलाश उठती है
कोई अनजाना , पुकारता चेहरा
खड़ी टटोलती मन दिखती है
कुछ कहना उस से है
पर क्या वो सोचती होगी
खोयी खोयी सी वो
हर दिन एक दिखती है


Thursday, 28 February 2019

सात जनम भी कम होंगे......

अब बदलना होगा तुम्हें
आज से हर बार में
कोई यूं ही साथ नही चलता
साथ दिखते हर बार में
साथ होना भर नही है
रिश्ता अपना एक सार में
फिर मिले - फिर मिले
कहते है ये हर बार में
याद रखना होगा हमें
वो दिन वो मुलाकात को
हिस्से की खुशी अपने
दामन में अब समेट कर
सहा हमने सब एक सा
चुप रह, चुप कह कर
हम मिलेगे फिर
ये सबको यकीं है
यकीन करो आज से
यकीन मजबूत होता यहीं से है
कल क्या होगा?
मत सोच ना
हम होगे या नहीं
किस्से होगे कहानियों में
कविताये गीत बनेगी
हम न होंगे
तुम कहॉ होगे
याद रखना हर जनम
सात जनम भी कम होगे

Wednesday, 27 February 2019

अब बदलना होगा तुम्हें....

कभी दुख न करना
अपने किसी सपने के टुकने का
कभी आंखे नम न करना
मेरे तुझ से दूर रहने का
ये वक्त ही कुछ ऐसा है
मिलेगी हिम्मत !
तुझे खुद अपने से
साथ हुंगा मैं तेरे
आस-पास साये में
दिखु न , तो गम न करना
आंखें फिर कभी
यूं नम न करना
अभी ऊंच-नीच
जीवन में बहुत हैं|
अब बदलना होगा तुम्हें
आज से हर बार में
कोई यूं ही साथ नही चलता
साथ दिखते हर बार में .

मेरे लिये....... प्यार से !

मैं कागज पे तेरा
पता लिख भी दू तो
वो पहुंचेगा न
फिर भी तेरे नाम से
कोई पीछे छूटा
हुआ पन्ना है तू
नही नाम है कुछ
उस किताब का
तेरे आज से मैने
कल सवारा अपना
न कल रहा मेरा
न आज नाम है
तू मिट गई
मेरे लिये
प्यार से
न प्यार मिल सका
न नाम जुड़  सका
वो खत सा कोरापन
मेरा संसार बन चुका
क्या पूछु में उस गली
उस शहर से
इल्जाम मेरा क्यूँ तूने
अपने नाम कर दिया 

Tuesday, 26 February 2019

मैं चांद पर जब लिखू...

मैं चांद पर लिख सकता हूँ
अगर तुम बनकर आओ शायरी
मेरी नींद में
मेरे ख्वाबो में
बस जाओ आज से
शर्त है यह
मिलेंगे फिर
चांद में
और भी है
कहना तुमसे
और भी है
कुछ बताना तुम्हें
शर्त है
हो अगर सामने
तो लिखेगे शायरी
बार बार कितनी ही बार
देखी कई खामियाँ
कभी तुझ में
कभी खुद में
नही ढुंढ पाया
ऐसी कभी कोई खामियाँ
बस लिखता रहा कभी तुझमें
कभी तुम में उतर कर शायरिया
मैं लिखता क्या हुं
ये तुम कब पढना
जब तुम्हें अकेलापन सताये
तब याद भले ही मेरी आये
तुम बस पढ लेना
मुझमें बस तुम बसी हो
आज बस गौर कर के पढ लेना

एक गीत

एक गीत मुझे जँचता
एक नाम ही में जपता
एक साज के साथ तेरे
एक ताल में मैं थिरकता
मन कर मन सी कोरी
मन के दर्पण में तुम ही
मन जानकर मन है
मन से निकल कर तुम ही
तुम पर मेरा वश है
तुम से है सब जरूरी
तुम खो नही सकती
तुम पाते सब भी
अन्तर मन में रखकर
हो समान तुम अन्दर बाहर

दूर से करता मुहब्बत....

हो अगर सकता ये मेरा
मॉग लेता मैं खुद से तुझे
डोर सी जुड़ी है तू जिन्दगी से
हार लेता खुद से तुझे
मॉग भी है ये मेरी
तू ही है बस आखिरी
आरजू में तेरे में
पार लेता सब से तुझे
एक दिन की बात होती
या फिर होती , सदियों की दूरी
दूर में रखता तुझे ही
सामने से अपने तुझे
पास में या दूर तू है
दूर में रखता तुझे
दूर से करता मुहब्बत
पास आ जँचता तुझे 

तेरे नाम से

अनगिनत बातो में तुम हो
अनगिनत हिस्से करू
अनगिनत करके दिशा
हर जगह है बस तू ही तू
बस घड़ी, पल दो पल का
साथ तो है ना तेरा मेरा
तेरे मेरे नाम से है
नाम सी जुड़ी जिन्दगी
जिन्दगी भर तुझे ही
देखता रहू सोचता
उम्मीद से बस अनगिनत
अनगिनत रहू तुझसे जुड़ा

Monday, 25 February 2019

सपने है क्या...

जब जब जिंदगी से में भागता रहा
अपने में कमीया देखी
खुद से बाहर झॉकता रहा
सपने तब भी मुझ से कोसो दूर थे
कोशिश करी पर सब नाकाम रहा
राह से में कई बार भटका
जो मन्जिले मिली उन की बाह थामें
मैं जरूर कुछ दूर निकला पर उतना भी नहीं
कि मैं लपक के पा लेता हर खुशी
शौक कई थे पर हाथ जैसे अब भी खाली थे
मैं लाख कोशिश कर लू
सपने सच कर ने की
फिर सपने ही तो है
अपने हुए कब
अकसर में शामिल हू
अब भी उन सपनो में
जब अपनो के बीच रहते रहते
हम सपनो से दूर निकल आते है
असल में सपने है क्या
अपनो से ज्यादा अहमियत
इन की कुछ भी नहीं... 

Sunday, 24 February 2019

आते हुए लोग....

सड़क में दिखे
कुछ आते हुए लोग
फुटपाथ में सोते
भीख मांगते हुए लोग
पत्थर की तरह पड़े हैं
सड़क के एक कोने पे
फिर भी मुस्कराते है ये
यूं ही जीते है
जिन्दगी हर रोज
कभी कुछ मिलता है
कभी कुछ भी नहीं
इतनी मुशकिलों में भी
जिन्दगी जीते है ये लोग
हर रोज देखता हुं
इन्हें अाते जाते में
में भी बेबस हूं, बेकार हुं
क्या कर सकता हुं में
लगता नही इनकी जिन्दगी में
कभी कोई सुबह होगी
हालात ये ही रहे
तो ये संख्या दोगुनी होगी....

Saturday, 23 February 2019

प्यार शब्द नामुमकिन नही जानता.....

क्यों ऐसा लगता है
किसी के जाने से
वक्त थम सा गया हो
ऐसा ही लगा था एक दफा
जब वो नजदीक से
बिना कुछ कहे चुपचाप
बिना एक नज़र भी
इस तरफ देखे
खामोशी से कदम  दबाये चली गई
कई सवाल पीछे छोड़ कर
एक मझगार में
बिन पतवार के
तन्हा अकेला सा
पीछे कुछ छुट गया था शायद
महसूस वो भी
इस बात को
कर रही थी
शायद वो इस बहाने कभी लौट सके
पीछे वैसे कुछ खास रहा तो नहीं
मगर कुछ तो है जिसे वो
आज भी तलाशती है
मेरे रूप में एक अधूरा प्यार
जो जिस्म में पड़ा
खुद की रूह तलाशता है
मुमकिन तो नहीं लगता देखने में
मगर प्यार शब्द !
नामुमकिन  शब्द नही जानता. 

Friday, 22 February 2019

यूं ही प्यार में कुछ...

जब भी ज़िन्दगी को जान ने निकला तो पाया हमारी सोच से कई अधिक लोग बस भाग रहे है पता नहीं ऐसा क्या है जो छूट गया है और ऐसा क्या है जो हम पकड़ ने निकले है मेरा मान ना है ज़िन्दगी में कुछ ना कुछ तो छुटेगा ही चाहे कितना ही कुछ सोचकर चल लो. खुद में ज़िन्दगी में बहुत कुछ छोड़ कर आगे बढ़ा हूं जानता भी हूं रूक जाने से कुछ नहीं रूकता...
प्यार सब को होता है कभी न कभी, किसी को पहले किसी को देर से कोई सब से छुपा कर रखता है कोई सब को बताकर कर. सच प्यार जब होता है तो फिर सब कुछ अच्छा सा लगने लगता है प्यार जो बदलाव लाता है ज़िन्दगी में बस वहीं से में मानता हूं ज़िन्दगी तब ही शुरू होती है आज तक हम जैसे भी जी रहे थे ये बस हम को पसन्द था हम को पता था हम क्या है और किस के लिए है फिर आज से या ये कहो अभी से जब हम प्यार में पड़ते है तब से सब कुछ बदलने लगता है |
एक प्यार ही है जो हम सब को जोड़ने के लिए बना है और इसके सिवा है क्या जिस से हम जुड़े. 

Thursday, 21 February 2019

कभी कभी....

जितना लोग तुमको जानते है
तुम उतनी सहज नही थी
कांच के मोटे फ्रेम से
झाँकती ये आंखें
उलझी हुई सी, ये लटे तुम्हारी
हर दिन की एक
अलग दास्तान कहते थे
तुम बोलती कम थी
मगर अन्दर से तुम
कितनी सहमी थी
ये कौन जानता है ?
उलझी हुई थी तुम
अपने में ही कहीं
दीवारों में झाँकती हुई सी
कुछ खोयी-खोयी सी तुम थी
कभी न किसी को
तुम ने अपना साथी बनाया
न उठा कर एक नज़र
इस तरफ कभी देखा
खुद अंधेरे में भटकती रही
ना जाने कौन सी सजा
तुम मुझे देती रही
ना कभी !
आंसू पौंछ सका तुम्हारे
न छु पाया कभी
इस नाजुक कलाई को
तुम कुछ कदमों के
फासले में रही मेरे
न कोई कदम मैं उठा सका
आने को पास तुम्हारे
फिर भी क्यों तुम
इतनी खामोश रही
न गम बाटा किसी से
खुद ही अन्दर ही अन्दर
हर रोज तुम घुटती रही
बेवजह मुस्कुराने की
कोशिश तुम करती रही
मगर अन्दर तुम कितना रोई थी
ये मेरे सिवा कौन जानता है
मैं हर रोज तुम्हारा
चेहरा पढ़ता था
गम जानता था मैं तुम्हारा
मगर हालात के हाथों
मैं भी कुछ मजबूर था
मेरा गम तुमसे
कुछ अलग था
तुम खुद से
लड़ रही थी
में हर हालात से
लड़ रहा था
पर रास्ते अलग-अलग थे
मगर मर्ज तो एक ही था
तुम उस तरफ सीधे जा रही थी
मगर में रूक-रूक के अपनी
हर सांस  गिन रहा था........... 


Wednesday, 20 February 2019

माफ करना गलती मेरी थी.

मैं सिर्फ एक दिन के लिए गायब क्या हुआ आप सभी को लगा मैने ब्लागीन छोड़ दी. ....में कही एसी जगह था जहाँ नेटवर्क शून्य थे. अगर आप सभी जो यहाँ आ कर मुझे पढ के है और आप सभी को यह लगा कि मैं आखिर गया तो गया कहां.  मैं उन सब से में हाथ जोड़ कर माफी मांगता हुं कि आगे से फिर कभी ऐसा न हो....... मुरली-मोहनी.

Tuesday, 19 February 2019

मेरे लिये बचाये रखना

तुम भूल सकते हो मुझे
तुम्हें पुरा हक है
नाम मेरा
ये पता पुराना
फाड़ देना
खत ये
क्या था कल
तेरा मेरा रिश्ता
भूल जाना
हर वो रिश्ता
नाम न लेना
फिर कभी
आज तुम्हारी यादों में
देखो कोई ओर जिन्दा होगा
कल जो हुआ
याद न करना
मुझे सोचकर
वक्त अपना
देखो आगे
बरबाद न करना
मरकर मेरा
शरीर मिटा है
मिटने न कभी
ये जज्बात देना
रखना मुझको
अन्दर जितना
छलकने न कभी
ये आंसू देना
कीमत इसकी बहुत है
मेरे लिये बरबाद न करना
देखा करना!
रोज सड़क पर
मैं ना आऊ ?
कब कहना
इतनी ही नफरत आगे भी
मेरे लिये बचाये रखना...... |

वो दोस्त मेरा

आज मिला सड़क पे
मुझे देख मुस्करा रहा था
दोस्त था ये वो ही
एक दूरी से मुझे सराह रहा था
नाम कितना चंचल है
ख्याल कितने अच्छे है
कल साथ साथ चला करता था
आज मुस्कराता भी थोड़ा दूर है
उसमें मुझमें थोड़ा अन्तर है
उसमें नफरत मुस्करा कर
मुझमें छिपी कुछ गम्भीर है
वो कल क्या करेगा
मालूम नहीं
आज थोड़ा
वो भी गम्भीर है
निशाना.....!
उसके खंजर का
कश्मीर नही
ये दिल है
वो पूछ रहा है
हर दिन मुझसे
जो हो ख्वाहिश मांग ले
मौत मेरी
कल निश्चित है
वक्त छोड़
कुछ और मांग ले
फिक्र मेरी
न करना
कल
कल......?
एेसा नही आयेगा
कविता मेरी
दोस्त कहीं
उसी से सड़क पे दोबारा
मुस्करा कर
सराहने
दूर नहीं
नजदीक मेरे
वो खामोश आयेगा....... 

अकसर

अकसर तुम से मिलकर में
नजरो को झुकाकर
बस मन ही मन
कहने के लिए न शब्द थे
तुम जो मेरे सामने थे
मेरे रंग में रंग कर तुम
मेरे अंग से सटकर तुम
मुझमें मुझ सी धुल जाती हो
मेरे में शामिल हों
जब तुम ! मुझमें रूक जाती हो

ईश्वर तुम मैं देवी तुम हो

जब जब मेरी बातों में तुम होती हो
बाते वही खाश,आसपास तुम होती  हो
में जब जब ये सोचता हूं
तुम में ऐसा क्या है
जो किसी और में नहीं
तुम में जो ठहराव है
वो मुझे बिखराव से बचाता हैं
तुम सा सौन्दर्य में कहां खौजु
क्यूं यूं में बेपरवाह हो और किसे क्यों ढुंगों
तुम मैं सब पा कर मेंने
एक  आधा युग पा लिया है
अब और क्या पाना मुझे
जब तुम में सब जग पा लिया है
मेरे शब्दो में  तुम हो
मेरी पंक्तियों मैं तुम हो
किस से तुम को कहां छुपाता
आंखों में जो बस तुम हो
मेरे हिस्से के दुख ले तुम
मौन रही तुम ,चुप ही थी
जब जब खुश था मैं
खुश थी तुम
जब गम आए मुझमें
बुत थी तुम
अन्दर अन्दर कई मरतबा
तुम खुद से उलझी
बस मौन रही तुम
ऐसा क्या है जो सब से छुपाऊ
मेरे लिए तुम
वो स्ञी हो
जिसे पूजू मैं
मन मन्दिर मे बैठा लू
ईश्वर तुम मैं
देवी तुम  हो

Monday, 18 February 2019

रेत की तरह

वक्त बदलता रहा
लोग बदलते रहे
मगर अब भी में वही था
जहां पहले था कभी
कई लोग गुज़र गये
बगल से मेरे
में कदम तक
न उठा सका
थम गया था वहीं
कुछ कदम चलना मुझे
एक मील लगने लगा
लोग भागते रहे
वक्त के साथ साथ
मैं पीछे रह गया
हमेशा की तरह
कोई व्यंग्य करता मुझपे
कोई कसता फब्तीयां
मैं सिर्फ सुनता रहा
एक लफ्ज तक
न कह सका
बेबस भी था, लाचार भी
किस उम्मीद से
देखता किसे
उनका भी हाल
कुछ ऐसा ही था
मुट्ठी से फिसरती
रेत की तरह

प्यार में कभी-कभी......

जो बात कहनी थी तुझसे
वो आज तक न कह सका
बस सदा दिल में चाहा तुझे
पर लबो से ये राज
ये राज न कह सका
निगाहो से तुम ने कभी
ये राज समझा नही
प्यार कहते है इसे
ये दर्द एक सा रहता नही
जो दिल में मेरे चल रहा था
उन सब से तुम अनजान थी
पहचानती थी तुम मुझे
मगर ईश्क से अनजान थी 
खैर इसी तरह जीते रहे
हम एकतरफा प्यार में
वो राज, राज ही रह गया
तुम बस गई
किसी और के संसार में 

नारी तेरे "आँचल" से

नारी तेरे आँचल से
दूध पिया था जिस नर ने
आज वो ही नर नारी को
बाजारो में नंगा करता है
नौ मास तक पाला था
जिसे तूने तन के एक हिस्से की तरह
आज वो ही नर, नारी तेरे
तन का धंधा करता है
निश्पाप तेरा मन है नारी
तू हर भूल को माफ करती है
पाप नाशनी गंगा की तरह
तू नर का तन-मन साफ करती है
कितना सहा है तूने
सदियों से आज तक
कभी उफ तक
न करी तूने
नारी... बिक जाने!
तक की लाज तक....




Saturday, 16 February 2019

पहला प्यार

क्यों पहला प्यार ही अकसर
टूटकर बिखर जाता है
कोई कितना ही चाहे किसी को
वो ही आधे रास्ते में
छोड़ कर चला जाता है
क्यों हम उसे
अपने सामने से जाते
बस देखते रहते हैं
टूट कर तो प्यार
पहले से बिखरा था
मगर छोड़ कर नजदीक से
अब जाते देखते हैं
लौटकर आने की
एक उम्मीद भी रखते हैं
उस से जुड़ी हर याद को
सम्भालकर सदा सिरहाने रखते हैं
क्यों इतनी बेकरारी से
हम उसका इन्तजार करते है
जिसने जाते वक्त एक दफा भी कभी
पलटकर कभी पीछे न देखा
उस से जुड़ी हर बात को
तब भी सीने में संजोकर रखते हैं


Friday, 15 February 2019

इस विनाश के पीछे कौन है?

कांप रही हैं क्यों आज धरा?
क्या किसी प्रलय की पहचान है
धुंआ ही धुंआ है हर तरफ
जागा है कौन ?
सब सोये पड़े हैं
इन लाशो के ढेरो में
मायूशिया सी झलकती है
कुछ चेहरो से
अब क्या करना है
ये सोचते अनजान है
अभी भी ,कुछ दबे पड़े है
मलबे के ढेरो में
मातमी माहौल सा है
लाशो के ढेरो पे
कुछ हमेशा के लिये
सो चुके है
कुछ जाग रहे है
जूझकर टूटती सांसो से
कब हुआ ?
ये कैसे हुआ?
इस बात पर सब मौन है
जवाब कहीं से मिलता नही
इस विनाश के पीछे कौन हैं?

ना रोके कोई संसार हमें!

तेरे ही नाम से शुरू
हर दिन अपना करता हूँ
तेरी ही उस निर्मल छवि को
मन -मन्दिर मे पूजा करता हूँ
देवी हो तुम मेरे हदय की
सरस्वती बन मेरी पंक्तियों
मैं बिखरती हो
तुम ही से मिला
मुझे ये रूप है
तुम ही मेरी जिंदगी में
आती छाँव धूप हो
तेरे ही प्यार से हम ने
खुद का एक आशियाना संजोया हैं
जहाँ सिर्फ तुम हो और में.....
अभी तो सिर्फ नींव डली है
अपने इस आशियाने कीं
वहां सिर्फ प्यार हो
न फिक्र हो किसी जमाने की
जिसकी छत के नीचे अपना
प्यार हद पार करे
न बीच में हो कोई दीवार
न रोके कोई संसार हमें.......






Thursday, 14 February 2019

काश! तुम कभी मेरे होते....

                 " काश! तुम कभी मेरे होते"
काश! तुम कभी  मेरे होते
तस्वीर में नही
हकीकत में सामने होते
तुम्हें जो सोच-सोचकर
जो वो दिन बिताये
काश! हर उस दिन में कभी
तुम मेरे साथ होते
पा तो नहीं सकता था
तुम्हें कभी ये जानता हूँ
मगर आखिर तक
तुम ही तलाश होते
तुम मिल भी जाते तब भी
हम यूं ही रहते
काश! तुम कभी मेरे होते
तस्वीर में ही नही
हकीकत में सामने होते
दिन ऐसे ही गुजरा लेते
तुझे सोच-सोचकर हम
फिर भी एक कसक सी
दिल में रहती सदा
तुम होते हुए भी मेरे
कभी दिल के पास ना होते
बस अंत तक
एक आस ही रहती
काश! तुम कभी मेरे होते
तस्वीर में ही नही
हकीकत में सामने होते
तुम्हें पाने के पल
जिंदगी मैं कम ही होते
फिर भी हकीकत में न सही
सिर्फ नाम से जुड़े
तुम मेरे होते
बार बार हर बार
दिल की ये ही फरियाद होती
काश! तुम कभी मेरे होते
 तस्वीर में ही नही
हकीकत में सामने होते
में कुछ पल के लिये
तुम्हें अपना कह लेता
उस पल भर के वक्त में
तुम्हारी निगाहों में
मैं उस वक्त
मैं अनजान ना रहता
तुम मुझे जानती, में तुम्हें जानता
बस इसी कुछ
अधूरे पल के सहारे
ताउम्र हम गुजार लेते यूं ही
बस कहने भर के लिए ही सही
काश! तुम कभी मेरे होते
तस्वीर में ही नही
हकीकत में सामने होते
काश! तुम कभी मेरे होते......




वेलेनटाइन डे पर कुछ खास

                तेरी राह देखता हैं!
में अब
उस गली से
नही गुजरता
जहॉ कभी
तेरा !
आना-जाना था
तुम तो चली गई
मुझे इस जहां में
छोड़ कर अकेला
अभी भी में उन यादों के
सहारे जिंदगी गुजार रहा हूँ
क्याें ये दिल नहीं मानता
कि तुम अब नहीं हो
फिर भी किस उम्मीद में
ये उस तरफ देखता है
जानता हूँ जाने वाले
कभी लौटकर आते नही
फिर भी पत्थर पे
फूल खिलने की तरह
ये दिल तेरी राह देखता है



Wednesday, 13 February 2019

"गुज़ारिश"

                                                "गुज़ारिश "
आप सभी मित्रो को जो मेरे लिखे ब्लॉग पढ रहे हैं व उनको ये अच्छे लग रहे तो उन से निवेदन है कि आप सभी आगे भी मुझे व मेरी कविता को पढे उस के लिए कृपया मेरे ब्लॉग को फोलो करे .
जिस से में आप सभी के लिए हर दिन यहॉ रोज कुछ अच्छा ले के आ सकू. बस आप सभी अपना वक़्त मुझे पढ ने को दे और मुझे फोलो करे ,धन्यवाद .
                                                                           - मुरली-मोहनी

"वो चिडिया "(कविता)

                          "वो चिडिया"
एक दिन झरोखे से बाहर झॉका को
देखा !एक चिडिया ,अपनी चोंच में..
मिट्टी में पड़े दानें चुग रही है
गर्दन घुमा -घुमा कर
आस-पास की आहट को सुन रही है
वो फुर्र से उड़कर
आम की डाल पर बैठकर
चोंच में रखे दाने
घौंसले में पड़े चुगों के
मुँह में धीरे-घीरे डाल रही है
वो चिडिया मां के रूप में
माया मोह के बंधन
में जकड़ी पड़ी है
वो जमीं व आंसमा के फासले को
जो सदियों से न मिले
उनहे मिलाने की कोशिश कर रही है
वो जानती है इस सच को
वो बच्चे जो घौंसलो में पड़े हैं
एक न एक दिन
दूर आकाश में
फुर्र से उड़ जायेगे
पीछे छोड़ जाएंगे
धौंसलौ मैं पड़ी
बीट व कुछ दानें
मगर वो चिडिया !
सब जानते
समझते हुए भी
ना जाने किस आस में
खुद का उदर
ना भर कर
उन के खातिर
बार -बार
रिस्क उठाकर
आते जा रही है
दाना चुगने
वो जमीं पे...... 

Tuesday, 12 February 2019

कभी तो सुबह होगी (कविता)

               " कभी तो सुबह होगी"
तुम दो कदम भी कभी
साथ चल न सके
कई पड़ावो से गुज़री थी
जब जिंदगी
तुम न जाने क्याे कभी
साथ-साथ न चले
जीने-मरने की साथ-साथ
कसमें खाई थी हमने
ना जाने तुन कब
इतने मतलबी बन गये
कभी कोई बात न छुपाई थी
तुमने मुझसे
आज क्यों तुम्हारी निगाहों मैं
वो विशवास नही है
कभी चाँद तोड़कर लाने की
तुम बात करते थे
में हंस कर कहती थी
अरे छोंडो!
कहीं गिर जाआेंगे
मुझे नही पता था
तुम इतने बदल जाओंगे
जिसको देख कर सुबह की
शुरूआत करते थे
अब उसके साये से भी
तुम इतना घबरा जाओंगे
मेरी उम्मीद अभी भी जिन्दा है
तुम लौटकर
कभी तो वापस आओंगे
चाहे फासलें!
तुम ने बढायें
या मेैंने
या फिर
वक्त ने
मुझे उम्मीद है इस रात की. ....
कभी तो सुबह होगी......!

दर्द (कविता)

वो छुपा रहे हैं आंसू
हमसे ही....
इतना तो हम भी जानते है
छुपता नही कभी दर्द यहां
आंखों में छुपा खौफ
सारी हकीकत कह रहा है
कितना सहा है उसने
ये बात कह रहा है
जरा सी आहट पे सिहर के
हथेली में मुँह छिपाना
सिसकिया भर के रोना
आँचल में मुँह छिपाना
हो गया है ये एक बहाना
अन्दर ही अन्दर वो
चुपचाप घुट रहे हैं
 बस आंसूओ से सारी
हर बात कह रहे हैं 

Monday, 11 February 2019

ये अहसास हो जाता है

                         कविता :-अहसास
ये अहसास हो जाता है
ना चाहते हुए भी अक्सर
किसी से प्यार हो जाता है
फिर हर लम्हा खुबसुरत, हर पल खुशगवार हो जाता है
दिल तो पागल होता है
हर एक तिनका संजों के रखता है
पर वक्त की आंधी और किस्मत का तूफान
साहिल से पहले ही
सब कुछ बहा ले जाता है
और पहला प्यार अकसर
अधखिले फुल की तरह
हमेशा अधुरा रह जाता है....




Sunday, 10 February 2019

बातें तुम्हारी

आज मन की खुली खिड़की से बाहर झॉका तो सोचा वक्त देखो कितनी तेजी निकल गया हो. जैसे कल कि ही बात हो, मैं जैसे भीड़ सा गुजर गया और कुछ अब भी भीड़ में थे;तुम को छुटे एक अरसा हो गया हो पर लगा कि जैसे कुछ पल ही गुजरे हो. 
ये राह अब मुझे किस और ले जाए क्या पता, पर एक बात है जो मुझे अब भी तुम से जोड़े हैं और वो हो तुम अौर बातें तुम्हारी.... 



ठहरी सी जिंदगी में

सिर्फ कागजों सी कोरी मेरी जिंदगी में हो तुम मेरे गम से और इस दिल से निकल गये हो तुम खाली सा है हर कोना क्यों बिखर गए हैं हम तुम मिलकर...