पते नही बदलते
न खत बदलते है
बदल जाते है
तो शब्द
वो जज्बात
जो कुछ देर पहले
अन्दर पल रहे थे
कुछ कह रहे थे
कुछ बदल रहे थे
कुछ सिमटे खामोश
बिखरकर चुपचाप
एक खत
किसी की लत बन
सज संवर रहे थे
सोचा, खामोश है
बिखेर दो
पर "पता" न था
न ठिकाना
न बहाना
न किनारा
जो बहकर
लग जाये
किनारे..........!
मुझ सा बेशक.
न खत बदलते है
बदल जाते है
तो शब्द
वो जज्बात
जो कुछ देर पहले
अन्दर पल रहे थे
कुछ कह रहे थे
कुछ बदल रहे थे
कुछ सिमटे खामोश
बिखरकर चुपचाप
एक खत
किसी की लत बन
सज संवर रहे थे
सोचा, खामोश है
बिखेर दो
पर "पता" न था
न ठिकाना
न बहाना
न किनारा
जो बहकर
लग जाये
किनारे..........!
मुझ सा बेशक.
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