Saturday, 2 March 2019

आखिरी रात...

वो कागज का कोना
वो बारिश में भीगा
जुड़ा हिस्सा हूँ में
तेरे नाम का
खुद ही से कई बार
मिलता रहा हुं
जुड़ा न किसी से
ये शब्द आज हैं
कोई नाम मेरा
पुकारे कही से
दीवारे है न कहीं
न कोई पास आज है
तुझे भूलना ही
अच्छा रहेगा
ये सितम की मेरी
आखिरी रात है|

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