Saturday, 11 May 2019

बस ! ....तुम संग हो.

में जब जब भागा हूं
खुद से या तेरी परछाई से
मुड़ कर पलटकर ये ही पाया
कभी ज्यादा दूर न जा सका
तुझ से या तेरी परछाई से
में लाख बार बहका हुं
कई बार रूका
बार बार मुड़ा हूं
बस ये ही जाना
तुम से रूठ कर
जब जब मैनें कदम उठायें हैं
सिवाये अंधकार के
मेरे संग कोई न था
तुम थी महज अन्तरमन में
हूबहू नजदीक
सामने कोई न था
में जब जब भटका हूं
तब तब मैनें तुम्हें
मुझे अंधेरो से
बाहर खिंचते पाया
आज फिर से
वही उम्मीद जता दो
तुम हो कहीं
यहीं मेरे आसपास
मेरे इर्दगिर्द जब जब तुम हो
यही लगा जैसे रब हो
रब सब देखता है
गौर करता है
फिर जरूरत हो सो साथ देता है
उस तरह तुम मेरे संग संग हो
बस यकीन करा दो
बस तुम संग हो....

Sunday, 5 May 2019

तेरे बिन

तेरे बिना अधुरा 
में अधुरी हो तुम 
रहे बिन कहीं 
ना ये कदम मेरे
फिरे इधर उधर 
जाने कहाँ कहां 
देखो देखा नही 
मैनें तुम्हें कल से
कल जैसे एक पल सा था 
थम गये हो हम जैसे 
गुजर गया वक्त जैसे 
फिर से एक बार मुठठी से 
लगा जैसे सब 

Friday, 3 May 2019

मैं टूट कर

मैं टूट कर
बिखरा हर बार
तुम मानो या ना मानो
हिस्सा हूँ बस तेरा
लाख रूठ लो तुम
रह पाओगी
न बिन मेरे
दूर कर मुझे
जी पाओगी
न बिन मेरे
तुम भी जानती हो
मुझको भी पता है ये
कई बार छुपा ले नजरें हम
सब जानते है क्या है दिल में
लब खुल पाये न कभी
दिल जानता है इस दिल में
सिर्फ तुम ही हो बस तुम ही हो
देखो रहे अब तक चुप तुम हम
प्यार छुपा ना कोई गम
गम का क्या है
आज है ,कल हो..... या ना हो !
तुम हम आज भी है
प्यार भरा ये जो दिल में है


ठहरी सी जिंदगी में

सिर्फ कागजों सी कोरी मेरी जिंदगी में हो तुम मेरे गम से और इस दिल से निकल गये हो तुम खाली सा है हर कोना क्यों बिखर गए हैं हम तुम मिलकर...