Thursday, 8 January 2026

ठहरी सी जिंदगी में

सिर्फ कागजों सी कोरी
मेरी जिंदगी में हो तुम
मेरे गम से और इस दिल से
निकल गये हो तुम
खाली सा है हर कोना
क्यों बिखर गए हैं हम तुम
मिलकर भी मिल ना पायें
क्यों खो गये हम तुम
फिर तुम से जिन्दगी में
मुलाकात हो या ना हो
बस इसी पल में जिलू
फिर ये जनम हो या ना हो
ठहरी सी जिंदगी में
ये सैलाब क्यों और कब आया
में ठहर गया क्यों दो पल
जग ने कर लिया किनारा
अब भीड़ में, मैं गुम हूं
तुम से फिर क्यों टकराया
इन रास्ताें में चल कर
बड़ी दूर हो गये हम
तुम न आते फिर इस तरह
हम तुम फिर मिल भी पाते या ना




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