Friday, 22 March 2019

वो तुम हो सिर्फ तुम हो.... और कोई नहीं.

राह से में जब जब भटका
हाथ पकड़ मुझे राह दिखाई तुमने
में कई बार गिरा, कई बार रूका
मुझे मंजिल बता राह दिखाई तुमने
में फिर गिरा, फिर उठा
मेरी बाह जो थामी वो तुम ने
लाख बार गिरते है हम
फिर हाथ बढ़ा के जो थाम ले
सच खुदा नहीं है
फिर लगा खुदा सा है कोई
जो हमें गिरने पर थाम ले
बाह फैला हमें समेट ले, हमें घेर ले
पुछता हूँ में सब से
कौन है वह. .. कौन है
जो हर पग है
हर पल है
हर छन है
हमें घेरे हुए

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