Sunday, 7 April 2019

मेरी किस्मत.... इतनी कमजोर क्यों है

माना ईश्क में हम
थोड़े कमजोर है
दुआ को उठा के हाथ
फिर दिखे किसे है
है एक पल का खोना
सदियों बिछड़ना
रब को पता है
उस से क्या छुपा है
दर्द में, मैं हूँ
ये तुम्हे भी पता है
समझ तुम सको
जानता हूँ इस से
अनजान तुम नही हो
कुछ हैरान हूं मैं
परेशान भी हूं
मेरी जिंदगी में
क्यूँ तूफां बहुत हैं
कभी सरर से मुझसे अपने छूटे
कितने सपने बस यू ही टूटे
हिस्से में ,मैं कितने बार बटा हुं
कई बार बिखरा
फिर एक जुट हुआ हूँ
"मेरी किस्मत !
इतनी कमजोर क्यों है
जब जब मिलना हो तुम से
फिर धुमाती इतना क्यों है "




No comments:

Post a Comment

ठहरी सी जिंदगी में

सिर्फ कागजों सी कोरी मेरी जिंदगी में हो तुम मेरे गम से और इस दिल से निकल गये हो तुम खाली सा है हर कोना क्यों बिखर गए हैं हम तुम मिलकर...