माना ईश्क में हम
थोड़े कमजोर है
दुआ को उठा के हाथ
फिर दिखे किसे है
है एक पल का खोना
सदियों बिछड़ना
रब को पता है
उस से क्या छुपा है
दर्द में, मैं हूँ
ये तुम्हे भी पता है
समझ तुम सको
जानता हूँ इस से
अनजान तुम नही हो
कुछ हैरान हूं मैं
परेशान भी हूं
मेरी जिंदगी में
क्यूँ तूफां बहुत हैं
कभी सरर से मुझसे अपने छूटे
कितने सपने बस यू ही टूटे
हिस्से में ,मैं कितने बार बटा हुं
कई बार बिखरा
फिर एक जुट हुआ हूँ
"मेरी किस्मत !
इतनी कमजोर क्यों है
जब जब मिलना हो तुम से
फिर धुमाती इतना क्यों है "
थोड़े कमजोर है
दुआ को उठा के हाथ
फिर दिखे किसे है
है एक पल का खोना
सदियों बिछड़ना
रब को पता है
उस से क्या छुपा है
दर्द में, मैं हूँ
ये तुम्हे भी पता है
समझ तुम सको
जानता हूँ इस से
अनजान तुम नही हो
कुछ हैरान हूं मैं
परेशान भी हूं
मेरी जिंदगी में
क्यूँ तूफां बहुत हैं
कभी सरर से मुझसे अपने छूटे
कितने सपने बस यू ही टूटे
हिस्से में ,मैं कितने बार बटा हुं
कई बार बिखरा
फिर एक जुट हुआ हूँ
"मेरी किस्मत !
इतनी कमजोर क्यों है
जब जब मिलना हो तुम से
फिर धुमाती इतना क्यों है "
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