Saturday, 6 April 2019

ये पल....

सोचकर देखो तुम
खुद को मुझमें पाओगी
माना दिल में तेरे बस में हूं
बस में और कोई नहीं
बस साये में
तेरे साथ साथ
तुम मुझे पाओगी
न तुम स्वप्न में हो ,न मैं
पर देखो फिक्र एक सी है
दोनों में एक दूजे के लिए
याद नही तुम को आखिरी बार
कब देखा कहां देखा था
बस में ही कसमकस में था
फिर याद आया कोई और भी था
मेरी तरह बेबाक, मेरी तरह तटस्थ
सोच में हु फिर कब मिलेगें
जानता हूँ ये पल
कभी यूं ही गुजरेगें

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