मैं चांद पर लिख सकता हूँ
अगर तुम बनकर आओ शायरी
मेरी नींद में
मेरे ख्वाबो में
बस जाओ आज से
शर्त है यह
मिलेंगे फिर
चांद में
और भी है
कहना तुमसे
और भी है
कुछ बताना तुम्हें
शर्त है
हो अगर सामने
तो लिखेगे शायरी
बार बार कितनी ही बार
देखी कई खामियाँ
कभी तुझ में
कभी खुद में
नही ढुंढ पाया
ऐसी कभी कोई खामियाँ
बस लिखता रहा कभी तुझमें
कभी तुम में उतर कर शायरिया
मैं लिखता क्या हुं
ये तुम कब पढना
जब तुम्हें अकेलापन सताये
तब याद भले ही मेरी आये
तुम बस पढ लेना
मुझमें बस तुम बसी हो
आज बस गौर कर के पढ लेना
अगर तुम बनकर आओ शायरी
मेरी नींद में
मेरे ख्वाबो में
बस जाओ आज से
शर्त है यह
मिलेंगे फिर
चांद में
और भी है
कहना तुमसे
और भी है
कुछ बताना तुम्हें
शर्त है
हो अगर सामने
तो लिखेगे शायरी
बार बार कितनी ही बार
देखी कई खामियाँ
कभी तुझ में
कभी खुद में
नही ढुंढ पाया
ऐसी कभी कोई खामियाँ
बस लिखता रहा कभी तुझमें
कभी तुम में उतर कर शायरिया
मैं लिखता क्या हुं
ये तुम कब पढना
जब तुम्हें अकेलापन सताये
तब याद भले ही मेरी आये
तुम बस पढ लेना
मुझमें बस तुम बसी हो
आज बस गौर कर के पढ लेना
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