Thursday, 28 February 2019

सात जनम भी कम होंगे......

अब बदलना होगा तुम्हें
आज से हर बार में
कोई यूं ही साथ नही चलता
साथ दिखते हर बार में
साथ होना भर नही है
रिश्ता अपना एक सार में
फिर मिले - फिर मिले
कहते है ये हर बार में
याद रखना होगा हमें
वो दिन वो मुलाकात को
हिस्से की खुशी अपने
दामन में अब समेट कर
सहा हमने सब एक सा
चुप रह, चुप कह कर
हम मिलेगे फिर
ये सबको यकीं है
यकीन करो आज से
यकीन मजबूत होता यहीं से है
कल क्या होगा?
मत सोच ना
हम होगे या नहीं
किस्से होगे कहानियों में
कविताये गीत बनेगी
हम न होंगे
तुम कहॉ होगे
याद रखना हर जनम
सात जनम भी कम होगे

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