Monday, 18 February 2019

नारी तेरे "आँचल" से

नारी तेरे आँचल से
दूध पिया था जिस नर ने
आज वो ही नर नारी को
बाजारो में नंगा करता है
नौ मास तक पाला था
जिसे तूने तन के एक हिस्से की तरह
आज वो ही नर, नारी तेरे
तन का धंधा करता है
निश्पाप तेरा मन है नारी
तू हर भूल को माफ करती है
पाप नाशनी गंगा की तरह
तू नर का तन-मन साफ करती है
कितना सहा है तूने
सदियों से आज तक
कभी उफ तक
न करी तूने
नारी... बिक जाने!
तक की लाज तक....




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