" कभी तो सुबह होगी"
तुम दो कदम भी कभी
साथ चल न सके
कई पड़ावो से गुज़री थी
जब जिंदगी
तुम न जाने क्याे कभी
साथ-साथ न चले
जीने-मरने की साथ-साथ
कसमें खाई थी हमने
ना जाने तुन कब
इतने मतलबी बन गये
कभी कोई बात न छुपाई थी
तुमने मुझसे
आज क्यों तुम्हारी निगाहों मैं
वो विशवास नही है
कभी चाँद तोड़कर लाने की
तुम बात करते थे
में हंस कर कहती थी
अरे छोंडो!
कहीं गिर जाआेंगे
मुझे नही पता था
तुम इतने बदल जाओंगे
जिसको देख कर सुबह की
शुरूआत करते थे
अब उसके साये से भी
तुम इतना घबरा जाओंगे
मेरी उम्मीद अभी भी जिन्दा है
तुम लौटकर
कभी तो वापस आओंगे
चाहे फासलें!
तुम ने बढायें
या मेैंने
या फिर
वक्त ने
मुझे उम्मीद है इस रात की. ....
कभी तो सुबह होगी......!
तुम दो कदम भी कभी
साथ चल न सके
कई पड़ावो से गुज़री थी
जब जिंदगी
तुम न जाने क्याे कभी
साथ-साथ न चले
जीने-मरने की साथ-साथ
कसमें खाई थी हमने
ना जाने तुन कब
इतने मतलबी बन गये
कभी कोई बात न छुपाई थी
तुमने मुझसे
आज क्यों तुम्हारी निगाहों मैं
वो विशवास नही है
कभी चाँद तोड़कर लाने की
तुम बात करते थे
में हंस कर कहती थी
अरे छोंडो!
कहीं गिर जाआेंगे
मुझे नही पता था
तुम इतने बदल जाओंगे
जिसको देख कर सुबह की
शुरूआत करते थे
अब उसके साये से भी
तुम इतना घबरा जाओंगे
मेरी उम्मीद अभी भी जिन्दा है
तुम लौटकर
कभी तो वापस आओंगे
चाहे फासलें!
तुम ने बढायें
या मेैंने
या फिर
वक्त ने
मुझे उम्मीद है इस रात की. ....
कभी तो सुबह होगी......!
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