Tuesday, 12 February 2019

दर्द (कविता)

वो छुपा रहे हैं आंसू
हमसे ही....
इतना तो हम भी जानते है
छुपता नही कभी दर्द यहां
आंखों में छुपा खौफ
सारी हकीकत कह रहा है
कितना सहा है उसने
ये बात कह रहा है
जरा सी आहट पे सिहर के
हथेली में मुँह छिपाना
सिसकिया भर के रोना
आँचल में मुँह छिपाना
हो गया है ये एक बहाना
अन्दर ही अन्दर वो
चुपचाप घुट रहे हैं
 बस आंसूओ से सारी
हर बात कह रहे हैं 

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