वक्त बदलता रहा
लोग बदलते रहे
मगर अब भी में वही था
जहां पहले था कभी
कई लोग गुज़र गये
बगल से मेरे
में कदम तक
न उठा सका
थम गया था वहीं
कुछ कदम चलना मुझे
एक मील लगने लगा
लोग भागते रहे
वक्त के साथ साथ
मैं पीछे रह गया
हमेशा की तरह
कोई व्यंग्य करता मुझपे
कोई कसता फब्तीयां
मैं सिर्फ सुनता रहा
एक लफ्ज तक
न कह सका
बेबस भी था, लाचार भी
किस उम्मीद से
देखता किसे
उनका भी हाल
कुछ ऐसा ही था
मुट्ठी से फिसरती
रेत की तरह
लोग बदलते रहे
मगर अब भी में वही था
जहां पहले था कभी
कई लोग गुज़र गये
बगल से मेरे
में कदम तक
न उठा सका
थम गया था वहीं
कुछ कदम चलना मुझे
एक मील लगने लगा
लोग भागते रहे
वक्त के साथ साथ
मैं पीछे रह गया
हमेशा की तरह
कोई व्यंग्य करता मुझपे
कोई कसता फब्तीयां
मैं सिर्फ सुनता रहा
एक लफ्ज तक
न कह सका
बेबस भी था, लाचार भी
किस उम्मीद से
देखता किसे
उनका भी हाल
कुछ ऐसा ही था
मुट्ठी से फिसरती
रेत की तरह
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