में जब जब भागा हूं
खुद से या तेरी परछाई से
मुड़ कर पलटकर ये ही पाया
कभी ज्यादा दूर न जा सका
तुझ से या तेरी परछाई से
में लाख बार बहका हुं
कई बार रूका
बार बार मुड़ा हूं
बस ये ही जाना
तुम से रूठ कर
जब जब मैनें कदम उठायें हैं
सिवाये अंधकार के
मेरे संग कोई न था
तुम थी महज अन्तरमन में
हूबहू नजदीक
सामने कोई न था
में जब जब भटका हूं
तब तब मैनें तुम्हें
मुझे अंधेरो से
बाहर खिंचते पाया
आज फिर से
वही उम्मीद जता दो
तुम हो कहीं
यहीं मेरे आसपास
मेरे इर्दगिर्द जब जब तुम हो
यही लगा जैसे रब हो
रब सब देखता है
गौर करता है
फिर जरूरत हो सो साथ देता है
उस तरह तुम मेरे संग संग हो
बस यकीन करा दो
बस तुम संग हो....
खुद से या तेरी परछाई से
मुड़ कर पलटकर ये ही पाया
कभी ज्यादा दूर न जा सका
तुझ से या तेरी परछाई से
में लाख बार बहका हुं
कई बार रूका
बार बार मुड़ा हूं
बस ये ही जाना
तुम से रूठ कर
जब जब मैनें कदम उठायें हैं
सिवाये अंधकार के
मेरे संग कोई न था
तुम थी महज अन्तरमन में
हूबहू नजदीक
सामने कोई न था
में जब जब भटका हूं
तब तब मैनें तुम्हें
मुझे अंधेरो से
बाहर खिंचते पाया
आज फिर से
वही उम्मीद जता दो
तुम हो कहीं
यहीं मेरे आसपास
मेरे इर्दगिर्द जब जब तुम हो
यही लगा जैसे रब हो
रब सब देखता है
गौर करता है
फिर जरूरत हो सो साथ देता है
उस तरह तुम मेरे संग संग हो
बस यकीन करा दो
बस तुम संग हो....
