Sunday, 3 March 2019
Saturday, 2 March 2019
आखिरी रात...
वो कागज का कोना
वो बारिश में भीगा
जुड़ा हिस्सा हूँ में
तेरे नाम का
खुद ही से कई बार
मिलता रहा हुं
जुड़ा न किसी से
ये शब्द आज हैं
कोई नाम मेरा
पुकारे कही से
दीवारे है न कहीं
न कोई पास आज है
तुझे भूलना ही
अच्छा रहेगा
ये सितम की मेरी
आखिरी रात है|
वो बारिश में भीगा
जुड़ा हिस्सा हूँ में
तेरे नाम का
खुद ही से कई बार
मिलता रहा हुं
जुड़ा न किसी से
ये शब्द आज हैं
कोई नाम मेरा
पुकारे कही से
दीवारे है न कहीं
न कोई पास आज है
तुझे भूलना ही
अच्छा रहेगा
ये सितम की मेरी
आखिरी रात है|
Friday, 1 March 2019
एक खत... वो शब्द.
पते नही बदलते
न खत बदलते है
बदल जाते है
तो शब्द
वो जज्बात
जो कुछ देर पहले
अन्दर पल रहे थे
कुछ कह रहे थे
कुछ बदल रहे थे
कुछ सिमटे खामोश
बिखरकर चुपचाप
एक खत
किसी की लत बन
सज संवर रहे थे
सोचा, खामोश है
बिखेर दो
पर "पता" न था
न ठिकाना
न बहाना
न किनारा
जो बहकर
लग जाये
किनारे..........!
मुझ सा बेशक.
न खत बदलते है
बदल जाते है
तो शब्द
वो जज्बात
जो कुछ देर पहले
अन्दर पल रहे थे
कुछ कह रहे थे
कुछ बदल रहे थे
कुछ सिमटे खामोश
बिखरकर चुपचाप
एक खत
किसी की लत बन
सज संवर रहे थे
सोचा, खामोश है
बिखेर दो
पर "पता" न था
न ठिकाना
न बहाना
न किनारा
जो बहकर
लग जाये
किनारे..........!
मुझ सा बेशक.
खोयी खोयी सी वो..
कभी कभी मन में
कोई तलाश उठती है
कोई अनजाना , पुकारता चेहरा
खड़ी टटोलती मन दिखती है
कुछ कहना उस से है
पर क्या वो सोचती होगी
खोयी खोयी सी वो
हर दिन एक दिखती है
कोई तलाश उठती है
कोई अनजाना , पुकारता चेहरा
खड़ी टटोलती मन दिखती है
कुछ कहना उस से है
पर क्या वो सोचती होगी
खोयी खोयी सी वो
हर दिन एक दिखती है
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