तुम से में न मिलू
ऐसा है ना होगा कभी
तुम जिन्दगी में
जब से आई हो मेरे लिये
क्या से क्या में बना
क्या था में क्या हुआ
तुम धड़कन
मुझमें तुम धड़कते हो
जाऊ में भी कहां
हर तरफ तुम बस तुम दिखते हो
पाऊ में या छोड़ दू
मुझमें तुम ही बसते हो
कागज सा कोरापन
जिन्दगी जैसे तुम बिन
में अधुरा हूं जैसे
तुम अधुरी हो मेरे बिन
लाख हम करे कोशिशते
मिल न पाए तो क्या हो फिर
जां में तुम हो मेरे
मिठ न जाये तो क्या करे
रूह से हम एक है
अब कायनात ही मिलाये हमें
देखाे क्या से क्या हो गया
में क्या था
क्या हो गया
मिले तुम कुछ पल
तड़पा में हर पल
राह में था
और भटका
था क्या
क्या हुआ
मिठ गया
तोड़ा गया
प्यार में .....
नफरत क्यों मिली
क्या यही हशर है
प्यार का
या जो प्यार में है
क्यों नफरत से देखते हैं
प्यार को या जो प्यार में हो
ऐसा है ना होगा कभी
तुम जिन्दगी में
जब से आई हो मेरे लिये
क्या से क्या में बना
क्या था में क्या हुआ
तुम धड़कन
मुझमें तुम धड़कते हो
जाऊ में भी कहां
हर तरफ तुम बस तुम दिखते हो
पाऊ में या छोड़ दू
मुझमें तुम ही बसते हो
कागज सा कोरापन
जिन्दगी जैसे तुम बिन
में अधुरा हूं जैसे
तुम अधुरी हो मेरे बिन
लाख हम करे कोशिशते
मिल न पाए तो क्या हो फिर
जां में तुम हो मेरे
मिठ न जाये तो क्या करे
रूह से हम एक है
अब कायनात ही मिलाये हमें
देखाे क्या से क्या हो गया
में क्या था
क्या हो गया
मिले तुम कुछ पल
तड़पा में हर पल
राह में था
और भटका
था क्या
क्या हुआ
मिठ गया
तोड़ा गया
प्यार में .....
नफरत क्यों मिली
क्या यही हशर है
प्यार का
या जो प्यार में है
क्यों नफरत से देखते हैं
प्यार को या जो प्यार में हो
