Tuesday, 23 April 2019

जिन्दगी जैसे तुम बिन...

तुम से में न मिलू
ऐसा है ना होगा कभी
तुम जिन्दगी में
जब से आई हो मेरे लिये
क्या से क्या में बना
क्या था में क्या हुआ
तुम धड़कन
मुझमें तुम धड़कते हो
जाऊ में भी कहां
हर तरफ तुम बस तुम दिखते हो
पाऊ में या छोड़ दू
मुझमें तुम ही बसते हो
कागज सा कोरापन
जिन्दगी जैसे तुम बिन
में अधुरा हूं जैसे
तुम अधुरी हो मेरे बिन
लाख हम करे कोशिशते
मिल न पाए तो क्या हो फिर
जां में तुम हो मेरे
मिठ न जाये तो क्या करे
रूह से हम एक है
अब कायनात ही मिलाये हमें
देखाे क्या से क्या हो गया
में क्या था
क्या हो गया
मिले तुम कुछ पल
तड़पा में हर पल
राह में था
और भटका
था क्या
क्या हुआ
मिठ गया
तोड़ा गया
प्यार में .....
नफरत क्यों मिली
क्या यही हशर है
प्यार का
या जो प्यार में है
क्यों नफरत से देखते हैं
प्यार को या जो प्यार में हो

Monday, 8 April 2019

या... तुम्हें प्यार करे हम !

हम ने तुम्हें क्यों इतना चाहा
कह भी न पाए ,क्यों तड़पाया
बस दिल ही दिल में
रही बात ये
तुम्हे सब पता है
जानते है ये
इन आँखों में बस एक बार
झाँक तो लो
किसका है चेहरा
ये जान तो लो
छुपाया है अब तक
तुम से ये राज कब से
बताते भी कैसे
छुपाते भी कितना
तुम्हे सब पता है
क्या तुम से छुपा है
ये हाल ऐ दिल मेरा
क्यो धड़कता है किस पे
समझो कभी तो जरा
चुप है हम तुम
एक दूसरे से
प्यार है कितना
है एक दूसरे से
दर्द में हम तुम
गुजरे एक दौर से हैं
कितना वक्त यूं बरबाद करा है
तड़पे है हम इस प्यार में इतने
कितने दिन और कितने लम्हे
सोच सोच कर हम रोये है
आँखे भर भर के सोये है
और अब कितना
इन्तजार करे हम
यूं ही जिन्दगी भर रोये
या तुम्हें प्यार करे हम


Sunday, 7 April 2019

देखों ...में सोया नही हूं

क्यों यादें तेरी कभी
मुझे रोने नही देती
आंखें हैं भरी पर
छलकने नही देती
दर्द बहुत है
बहुत जोरों का
इसी दर्द में कई बार
बस जिए जा रहे है
कई भागते दिखे है
साये से अपने
पलट कर न देखें तो क्या
फर्क है उन में मुझमें
में तेरे इश्क़ में हूं
फिर भी सताया गया हूं
भगाया गया हूं
रूलाया गया हूं
कदम दर कदम
बस अंधेरा मिला है
न रोशनी मिली है
न सवेरा दिखा है
हारा हुं में कई बार भटका हूं
बिना तेरे कितनी
रातें जगा हुं
सपने भी खाली
तुम बिन भी में खाली
देखो मेरे पास
आखिर क्या बचा हैं
आओ मेरे पास
पास बैठों मेरे
देखो में कब से
देखो. . में सोया नही हूं.


मेरी किस्मत.... इतनी कमजोर क्यों है

माना ईश्क में हम
थोड़े कमजोर है
दुआ को उठा के हाथ
फिर दिखे किसे है
है एक पल का खोना
सदियों बिछड़ना
रब को पता है
उस से क्या छुपा है
दर्द में, मैं हूँ
ये तुम्हे भी पता है
समझ तुम सको
जानता हूँ इस से
अनजान तुम नही हो
कुछ हैरान हूं मैं
परेशान भी हूं
मेरी जिंदगी में
क्यूँ तूफां बहुत हैं
कभी सरर से मुझसे अपने छूटे
कितने सपने बस यू ही टूटे
हिस्से में ,मैं कितने बार बटा हुं
कई बार बिखरा
फिर एक जुट हुआ हूँ
"मेरी किस्मत !
इतनी कमजोर क्यों है
जब जब मिलना हो तुम से
फिर धुमाती इतना क्यों है "




में हू तेरे आस-पास...

ना कह सकू ना तुम से ये कह सका आज तक रहो कही भी पर रखना दिल पे मेरी कही हर बात रहो तुम कही पर ये रहे याद में हू तेरे आस-पास यहीं कहीं

ठहरी सी जिंदगी में

सिर्फ कागजों सी कोरी मेरी जिंदगी में हो तुम मेरे गम से और इस दिल से निकल गये हो तुम खाली सा है हर कोना क्यों बिखर गए हैं हम तुम मिलकर...