Sunday, 7 April 2019

में हू तेरे आस-पास...

ना कह सकू ना तुम से ये कह सका आज तक रहो कही भी पर रखना दिल पे मेरी कही हर बात रहो तुम कही पर ये रहे याद में हू तेरे आस-पास यहीं कहीं

Saturday, 6 April 2019

मरना तुम ही संग हैं....

ये दो पल का जीना
इस प्यार को में क्या नाम दू अब
ख्वाबो में मिलना, हकीकत हैं बिछड़ना
कहे भी क्या तुम से, छुपा भी क्या पाये
सच ये ही है बस ,बिछड़ना फिर मिलना
समझ तुम भी गये हो
पता मुझको भी है
इस एक जनम को छोड़
बस मिलना हर जनम है
भटक हम रहे है
भटका सब रहे है
बता कुछ रहे नहीं
थका सब रहे है
ये सावन के झूले
बिन तेरे हम अकेले
रह भी न पाए
कुछ कह भी न पाए
माना इस मोहब्बत में
अभी सहना बहुत है
मिलना लिखा हो या ना हो
सबर रखना बहुत है
घुट घुट कर हम जी सब रहे हैं
गिन गिन कर सांसे रोज ले रहे है
कब तक यू जीना है
क्यों जग में रहना है
मिलना नही, फिर
बिछ़डना ही क्यों लिखा है
देखो जिन्दगी हम से
ये क्या कह रही है
मिला तो नहीं सकती
क्यों फिर सता रही हैं
लाख आये अड़चनें
फिर भी मिलना तुम ही से
पा न सके तो क्या
मरना तुम ही संग हैं



फिर एक बार

देखो फिर एक बार
तकदीर हमें एक-दूसरे के
सामने ले आई
हम एक दूसरे से नफरत
चाहे लाख कर ले
बस प्यार ही है
जो हम एक दूसरे से
बस एक सा करते है
हम लाख झूठला ले
खुद को इस हकीकत के
पायेगें हमेशा, खुद को ईरद गिरद इस के 

ये पल....

सोचकर देखो तुम
खुद को मुझमें पाओगी
माना दिल में तेरे बस में हूं
बस में और कोई नहीं
बस साये में
तेरे साथ साथ
तुम मुझे पाओगी
न तुम स्वप्न में हो ,न मैं
पर देखो फिक्र एक सी है
दोनों में एक दूजे के लिए
याद नही तुम को आखिरी बार
कब देखा कहां देखा था
बस में ही कसमकस में था
फिर याद आया कोई और भी था
मेरी तरह बेबाक, मेरी तरह तटस्थ
सोच में हु फिर कब मिलेगें
जानता हूँ ये पल
कभी यूं ही गुजरेगें

Friday, 5 April 2019

जिन्दगी की कतरन...

जब जब तुम मेरी जिंदगी में आई
तब तब में शामिल रहा
फिर जैसे लगा
कुछ छुट गया हो पीछे
राह में था पर राह छूट रही हो जैसे
लगा मुझे जैसे कुछ छुट रहा हो पीछे
मैं जानता हूँ मै लायक नहीं था कल भी
आज सब है पर फिर भी एक खालीपन सा है
अन्दर ही अन्दर जैसे टूट गया हूँ मैं
सब बिखर गया हो मुझसे
मैं अन्दर से हिम्मत कितनी ही कर लू
पर टूटकर बिखरा हर बार में ही हूं
जानता हूँ सब किस्मत के हाथों है
टूट ना बिखरना
हार कर ही सही
हारा हुं में अपनो से ही
गम भर रहा ये
मैं क्या हूँ
क्या से क्या हो गया मैं
अब खोने को कुछ नहीं था
फिर भी पाने की चाह मन में थी
वो सब पाने की
जो कतरनों की शक्ल में
मुझसे फिसरते रहे ,छूटते रहे




तन्हा सा में

बात जब जब कर लू
पर सपने में ,मैं
अब भी खाली हुं
अकेला सा में
तुम को सोचु
तुम पर लिखू
कागज सा कोरापन
रख अन्दर अन्दर
कितना हूं खाली तन्हा सा में 

Monday, 1 April 2019

सच ......भाग ने से !

आजमाकर देख ली कई बार जिन्दगी
सच ये तब पता लगा
गैरों की इस भीड़ में
सब तमाशबीन है
अपना कोई नहीं
जानते है ये बस
छलावा है और कुछ नहीं
सब हार कर भी
पता लगा तो
क्या पता लगा
सब खो कर जाना
कभी महसूस
पा कर किया नहीं
सच ही कहते है
अक्ल तब आती है
जब सब खो दो
सब कुछ हार के
पीछे छोड़ दो
में भागा हुं जब जब
खुद से या जिन्दगी से
मुझे वो ही मिला
सब छोड़ के
पीछे मुड़ के
नसीब से
सच ....भाग ने
सब पीछे नहीं छूटता
कुछ न कुछ रह जाता है
अन्दर और अन्दर....






ठहरी सी जिंदगी में

सिर्फ कागजों सी कोरी मेरी जिंदगी में हो तुम मेरे गम से और इस दिल से निकल गये हो तुम खाली सा है हर कोना क्यों बिखर गए हैं हम तुम मिलकर...