Thursday, 28 February 2019

सात जनम भी कम होंगे......

अब बदलना होगा तुम्हें
आज से हर बार में
कोई यूं ही साथ नही चलता
साथ दिखते हर बार में
साथ होना भर नही है
रिश्ता अपना एक सार में
फिर मिले - फिर मिले
कहते है ये हर बार में
याद रखना होगा हमें
वो दिन वो मुलाकात को
हिस्से की खुशी अपने
दामन में अब समेट कर
सहा हमने सब एक सा
चुप रह, चुप कह कर
हम मिलेगे फिर
ये सबको यकीं है
यकीन करो आज से
यकीन मजबूत होता यहीं से है
कल क्या होगा?
मत सोच ना
हम होगे या नहीं
किस्से होगे कहानियों में
कविताये गीत बनेगी
हम न होंगे
तुम कहॉ होगे
याद रखना हर जनम
सात जनम भी कम होगे

Wednesday, 27 February 2019

अब बदलना होगा तुम्हें....

कभी दुख न करना
अपने किसी सपने के टुकने का
कभी आंखे नम न करना
मेरे तुझ से दूर रहने का
ये वक्त ही कुछ ऐसा है
मिलेगी हिम्मत !
तुझे खुद अपने से
साथ हुंगा मैं तेरे
आस-पास साये में
दिखु न , तो गम न करना
आंखें फिर कभी
यूं नम न करना
अभी ऊंच-नीच
जीवन में बहुत हैं|
अब बदलना होगा तुम्हें
आज से हर बार में
कोई यूं ही साथ नही चलता
साथ दिखते हर बार में .

मेरे लिये....... प्यार से !

मैं कागज पे तेरा
पता लिख भी दू तो
वो पहुंचेगा न
फिर भी तेरे नाम से
कोई पीछे छूटा
हुआ पन्ना है तू
नही नाम है कुछ
उस किताब का
तेरे आज से मैने
कल सवारा अपना
न कल रहा मेरा
न आज नाम है
तू मिट गई
मेरे लिये
प्यार से
न प्यार मिल सका
न नाम जुड़  सका
वो खत सा कोरापन
मेरा संसार बन चुका
क्या पूछु में उस गली
उस शहर से
इल्जाम मेरा क्यूँ तूने
अपने नाम कर दिया 

Tuesday, 26 February 2019

मैं चांद पर जब लिखू...

मैं चांद पर लिख सकता हूँ
अगर तुम बनकर आओ शायरी
मेरी नींद में
मेरे ख्वाबो में
बस जाओ आज से
शर्त है यह
मिलेंगे फिर
चांद में
और भी है
कहना तुमसे
और भी है
कुछ बताना तुम्हें
शर्त है
हो अगर सामने
तो लिखेगे शायरी
बार बार कितनी ही बार
देखी कई खामियाँ
कभी तुझ में
कभी खुद में
नही ढुंढ पाया
ऐसी कभी कोई खामियाँ
बस लिखता रहा कभी तुझमें
कभी तुम में उतर कर शायरिया
मैं लिखता क्या हुं
ये तुम कब पढना
जब तुम्हें अकेलापन सताये
तब याद भले ही मेरी आये
तुम बस पढ लेना
मुझमें बस तुम बसी हो
आज बस गौर कर के पढ लेना

एक गीत

एक गीत मुझे जँचता
एक नाम ही में जपता
एक साज के साथ तेरे
एक ताल में मैं थिरकता
मन कर मन सी कोरी
मन के दर्पण में तुम ही
मन जानकर मन है
मन से निकल कर तुम ही
तुम पर मेरा वश है
तुम से है सब जरूरी
तुम खो नही सकती
तुम पाते सब भी
अन्तर मन में रखकर
हो समान तुम अन्दर बाहर

दूर से करता मुहब्बत....

हो अगर सकता ये मेरा
मॉग लेता मैं खुद से तुझे
डोर सी जुड़ी है तू जिन्दगी से
हार लेता खुद से तुझे
मॉग भी है ये मेरी
तू ही है बस आखिरी
आरजू में तेरे में
पार लेता सब से तुझे
एक दिन की बात होती
या फिर होती , सदियों की दूरी
दूर में रखता तुझे ही
सामने से अपने तुझे
पास में या दूर तू है
दूर में रखता तुझे
दूर से करता मुहब्बत
पास आ जँचता तुझे 

तेरे नाम से

अनगिनत बातो में तुम हो
अनगिनत हिस्से करू
अनगिनत करके दिशा
हर जगह है बस तू ही तू
बस घड़ी, पल दो पल का
साथ तो है ना तेरा मेरा
तेरे मेरे नाम से है
नाम सी जुड़ी जिन्दगी
जिन्दगी भर तुझे ही
देखता रहू सोचता
उम्मीद से बस अनगिनत
अनगिनत रहू तुझसे जुड़ा

ठहरी सी जिंदगी में

सिर्फ कागजों सी कोरी मेरी जिंदगी में हो तुम मेरे गम से और इस दिल से निकल गये हो तुम खाली सा है हर कोना क्यों बिखर गए हैं हम तुम मिलकर...